एक लाचार माँ और बेबस बेटी जो तकरीबन 2 माह से नहीं आ पा रही एक दूसरे के पास

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एक लाचार माँ और बेबस बेटी जो तकरीबन 2 माह से नहीं आ पा रही एक दूसरे के पास

कलेक्टर प्रीति मैथिल अपनी मासूम बिटिया से दूर रहकर करती है बाते

दो माह से नहीं उठाया गोद मे नही किया दुलारा

“जब बेटी को सीने से न लगा पाने की कसक उठती है,
तो मुँह छुपाकर आंखों से आंसुओ को ढलका देती हैं और
मुस्कुराकर कहती हैं सोना मेरी बहादुर बेटी”

सागर । उनकी 5 साल की एक बिटिया है, वह उसे सोना कहकर बुलाती हैं, वैश्विक महामारी कोरोना के चलते जिम्मेदारी बड़ी है तो लगातार 16 घंटे फील्ड पर ही बिताना पड़ रहा है। 24 घंटे के दरमियान कुछ वक्त जब मिलता है तो अपनी बेटी को वह दूर से देख लेती हैं उससे बात कर लेती हैं, जब बेटी को सीने से न लगा पाने की कसक उठती है तो मुँह छुपाकर आंखों से आंसुओ को ढलका देती हैं और मुस्कुराकर कहती हैं सोना मेरी बहादुर बेटी है। सोेना भी दूर से ही अपनी माँ को इशारा करती है और कहती है बहादुर माँ की बहादुर बेटी…।
सोना कोई और नहीं सागर जिले की कलेक्टर श्रीमती प्रीति मैथिल की 5 वर्षीय बेटी का नाम है। यह तस्वीर है एक लाचार माँ और बेबस बेटी की जो तकरीबन 2 माह से एक दूसरे के पास नहीं आ सकी हैं। हालात ऐसे हैं कि माँ अपनी बेटी को कलेजे से नहीं लगा सकती और न बिटिया माँ की गोद में अपना सिर रखकर सो सकती है। कलेक्टर प्रीति मैथिल कोरोना से सड़कों पर जंग लड़ते हुए अपने अधिकारी-कर्मचारियों का हौसला बढ़ा रही हैं।

सागर में कोरोना रफ्तार पकड़े है तो कलेक्टर माँ ने अपनी बेटी से खुद दूरियां बना ली हैं, उन्होंने कोई दो माह से अपनी बेटी के लिए अलग रूम में उसकी सब जरूरत की चीजों को रख दिया है और खुद अपने अलग कमरे में कोरोना के खिलाफ जंग के मैदान को संभाले हुए हैं।
सागर को नाज है ऐसी लोकसेवक पर और यह तमाचा है उन लोगों के मुँह पर जो यह कहते हैं कि यह तो उनका कर्तव्य है। हमें एहसास करना होगा कि महज पांच साल की बेटी और माँ एक ही घर मे रहते हुए सिर्फ दूर कभी कभार एक दूसरे से बात कर लेती हैं। कैसे होता होगा वह पल जब नौ माह अपनी कोख में रखी बिटिया को एक माँ अपने कलेजे से न लगा पाये और बेटी सिर्फ आशा भरी निगाहों से माँ को देखती रहे। उम्मीद है सागर के नागरिक इस जज्बे को समझेंगे और जो हिदायत निवेदन प्रशासन द्वारा किया जा रहा है उस पर अमल करेंगे। अब हालात बेकाबू हो चले हैं तो प्रशासन के साथ हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी वरना कोरोना बाहर आपकी राह तक रहा है, इसलिए सुरक्षित और स्वस्थ रहें।

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