भारत-चीन तनाव: दोनों देशों की सेनाओं के बीच 20 दिन में तीन बार हुई फायरिंग

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पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में वास्तविक नियंत्रण रेखा (actual line of control) पर जारी तनाव के बीच भारत और चीन की सेनाओं ने 20 दिन में तीन बार फायरिंग की है।

हाइलाइट्स:

  • पहली फायरिंग: जब 29-30 अगस्त को दक्षिणी पैंगोंग में
  • दूसरी फायरिंग: सात सितंबर को मुखपारी की चोटियों पर
  • तीसरी फायरिंग: पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर 8 सितंबर को

नई दिल्ली
करीब 45 सालों तक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर एक भी गोली नहीं चली, लेकिन चीन की नापाक हरकतों की वजह से अब बॉर्डर पर माहौल बिगड़ने लगा है। जानकारी के मुताबिक, 20 दिन में पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर भारत-चीन के बीच तीन बार फायरिंग की घटना हो चुकी है। दूसरी ओर पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना की ओर से किए जा रहे दुस्साहस की वजह से जारी तनाव के बीच, भारतीय सेना ने अपने अजेय बोफोर्स हॉवित्जर को ऑपरेशन के लिए तैयार कर लिया है।

पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे दो बार फायरिंग
भारतीय सेना सूत्रों के मुताबिक, 29-30 अगस्त की रात को जब चीन ने पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे चुशूल सेक्टर के अपॉजिट मूवमेंट किया और भारतीय इलाके में घुसपैठ की कोशिश की तब भारतीय सैनिकों ने उन्हें चेतावनी देने के लिए हवा में फायरिंग की। चीनी सैनिकों की तरफ से भी हवा में फायरिंग की गई। इस दौरान भारतीय सैनिकों ने दक्षिण किनारे अहम चोटियों पर अपनी पोजिशन जमा ली। जिससे भारतीय सेना वहां अडवांटेज पोजिशन में आ गई। 7 सितंबर को चीनी सैनिकों ने इन्हीं चोटियों पर भारतीय पोजिशन के करीब आने की कोशिश की भारतीय सेना ने जो वायर ऑब्स्टिकल लगाई हैं उन्हें काटने की कोशिश की। तब चीनी सैनिकों को चेतावनी देने के लिए भारतीय सैनिकों ने हवा में फायरिंग की। चीनी सैनिकों ने भी दबाव बनाने के लिए फायरिंग की। दोनों बार 2-3 राउंड फायर ही हुआ।

9 सितंबर को हुई फिंगर-4 के पास फायरिंग
10 सितंबर को मॉस्को में भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की मीटिंग थी इससे पहले 9 सितंबर को चीनी सैनिकों ने पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर फिंगर-4 के पास भारतीय पोजिशन के करीब आने की कोशिश की। यहां फिंगर-4 की चोटी पर चीनी सैनिक डटे हुए हैं लेकिन भारतीय सैनिकों ने फिंगर- 3 से होते हुए फिंग -4 के पास की उन चोटी पर तैनाती कर दी है, जिससे वह चीनी सैनिकों से ज्यादा ऊंचाई पर डटे हैं। ज्यादा ऊंचाई की वजह से भारतीय सेना यहां अडवांटेज पोजिशन पर है। 9 सितंबर को चीनी सैनिकों ने इसके करीब आने की कोशिश की और फिर दोनों देशों की तरफ से हवा में फायरिंग हुई। सूत्रों के मुताबिक यहां पर 100 से ज्यादा राउंड फायर हुए।

आर्मी के एक अधिकारी के मुताबिक विदेश मंत्रियों की मीटिंग के बाद एलएसी पर कोई नई मूवमेंट नहीं हुई है। हालांकि तनाव बरकरार है। चुशूल सेक्टर में चोटियों के पास ही कम से कम तीन जगहों पर भारत-चीन के सैनिक 300 मीटर की दूरी पर डटे हैं। फिंगर एरिया में भी एक दूसरे की फायरिंग रेंज में हैं। हालांकि चीन की तरफ से कोई अग्रेसिव कदम नहीं उठाया गया और न ही फिर भारतीय पोजिशन के करीब आने की कोशिश की गई।

कोर कमांडर मीटिंग में देरी मुमकिन
12 सिंतबर के बाद चुशूल में भारत-चीन के बीच ब्रिगेड कमांडर स्तर की मीटिंग नहीं हुई। शनिवार को आखिरी मीटिंग हुई थी। आर्मी के एक अधिकारी के मुताबिक ब्रिगेड कमांडर लगातार इसलिए मिल रहे थे ताकि हर रोज की मूवमेंट पर बात हो सके। विदेश मंत्रियों की मीटिंग के बाद कोई मूवमेंट नहीं हुई है इसलिए मीटिंग की जरूरत नहीं लगी। सूत्रों के मुताबिक अभी तक कोर कमांडर मीटिंग का अजेंडा तय नहीं हो पाया है। इसलिए इसकी भी संभावना बनी हुई है कि मीटिंग में कुछ देरी हो सकती है। पहले कहा गया था कि मीटिंग इसी हफ्ते होगी। आर्मी के एक अधिकारी के मुताबिक अभी तक मीटिंग की तारीख पर किसी भी तरफ से कोई बात नहीं हुई है इसलिए यह भी मुमकिन है कि मीटिंग इस हफ्ते ना होकर बाद में हो।

बोफोर्स भी तैयार
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, लद्दाख में बोफोर्स तोपों को भी ऑपरेशन के लिए तैयार किया जा रहा है। लद्दाख में इंजिनियर्स 155 मिमी बोफोर्स तोप की सर्विसिंग और मेंटिनेंस का काम कर रहे हैं। बोफोर्स तोप को 1980 के दशक के मध्य में तोपखाने की रेजिमेंट में शामिल किया गया था।

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